बड़ी खबर:पथरी जंगल में खैर के कीमती पेड़ों की चोरी,मिलीभगत के आरोप कार्रवाई की तेज़ मांग
पथरी जंगल एक बार फिर लकड़ी तस्करों के निशाने पर आ गया है।
हरिद्वार।पथरी जंगल एक बार फिर लकड़ी तस्करों के निशाने पर आ गया है। 14 मार्च की रात अज्ञात तस्करों द्वारा खैर के 3-4 कीमती पेड़ों को काटकर चोरी किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। सुबह जब स्थानीय लोग और ग्रामीण मौके पर पहुंचे तो वहां सिर्फ कटे हुए पेड़ों के ठूंठ ही दिखाई दिए, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया।
जानकारी के अनुसार चोरी किए गए खैर के पेड़ों की गोलाई लगभग 4 से 5 फीट बताई जा रही है, जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह पेड़ कई साल पुराने और बेहद कीमती थे। खैर की लकड़ी बाजार में लाखों रुपये में बिकती है, ऐसे में इस घटना से न सिर्फ सरकार को आर्थिक नुकसान हुआ है बल्कि पर्यावरण को भी भारी क्षति पहुंची है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। पथरी जंगल में पहले भी कई बार खैर और चंदन के पेड़ों की चोरी हो चुकी है। हैरानी की बात यह है कि इतने गंभीर मामलों के बावजूद आज तक एक भी बड़ा तस्कर पकड़ा नहीं जा सका है, जिससे वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
हद तो तब हो गई जब कुछ माह पहले पथरी रेंज की वन चौकी के पास ही चंदन के पेड़ों को चोरों ने काट डाला था। उस घटना में भी आज तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी, जिससे साफ जाहिर होता है कि तस्करों के हौसले किस कदर बुलंद हैं और निगरानी व्यवस्था कितनी कमजोर है।
ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों ने आरोप लगाया है कि जंगल के अंदर इस तरह की घटनाएं बिना किसी अंदरूनी जानकारी के संभव नहीं हैं। लोगों का कहना है कि कहीं न कहीं कुछ वन अधिकारियों या कर्मचारियों की मिलीभगत से इन तस्करों को संरक्षण मिल रहा है, जिसके कारण वे बेखौफ होकर बार-बार इस तरह की वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।
इस पूरे मामले को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता मौ. सलीम (ग्राम घिस्सुपुरा, पोस्ट धनपुरा, थाना पथरी) ने प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) हरिद्वार को लिखित शिकायत देकर निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने दोषियों की जल्द गिरफ्तारी, संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की जांच और सख्त कार्रवाई करने की मांग उठाई है।
साथ ही उन्होंने जंगल क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने, नियमित गश्त बढ़ाने, रात्रि निगरानी को सख्त करने और संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करने की भी मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।
घटना के बाद क्षेत्र में भारी आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। अब देखने वाली बात यह होगी कि वन विभाग इस गंभीर मामले में कितनी तेजी और निष्पक्षता से कार्रवाई करता है।





