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डेढ़ साल से बदहाल 300 मीटर सड़क, ‘बजट नहीं’ के जवाब पर भड़के ग्रामीण—22 सितंबर के प्रदर्शन के बाद अब आर-पार की तैयारी

घिस्सुपुरा के 300 मीटर रास्ते पर प्रशासन से ग्रामीणों का सीधा सवाल—आखिर सड़क कब बनेगी? 22 सितंबर के प्रदर्शन के बाद भी जिम्मेदार खामोश

डेढ़ साल से बदहाल 300 मीटर सड़क, ‘बजट नहीं’ के जवाब पर भड़के ग्रामीण—22 सितंबर के प्रदर्शन के बाद अब आर-पार की तैयारी
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(रिपोर्ट: गुलज़ार अहमद)- धनपुरा, हरिद्वार। जल जीवन मिशन के तहत पेयजल लाइन बिछाने के लिए घिस्सुपुरा गांव में करीब डेढ़ साल पहले लगभग 300 मीटर सड़क को खोदा गया था, लेकिन काम पूरा होने के बाद सड़क की मरम्मत आज तक नहीं कराई गई। नतीजा यह है कि जिस रास्ते से रोजाना ग्रामीण, स्कूली बच्चे, बुजुर्ग और दोपहिया वाहन गुजरते हैं, वही रास्ता अब गड्ढों और धूल से परेशानियों का कारण बना हुआ है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब करोड़ों रुपये की पेयजल योजना के लिए काम कराया जा सकता है, तो उसके बाद महज 300 मीटर सड़क को दुरुस्त कराने के लिए बजट क्यों नहीं है?

ग्रामीणों के अनुसार, वे इस समस्या को लेकर जिलाधिकारी तक पहुंचे। वहां से उन्हें बताया गया कि जल जीवन मिशन में सड़क की मरम्मत के लिए बजट उपलब्ध नहीं है। यह जवाब ग्रामीणों के गले नहीं उतर रहा है। उनका कहना है कि सड़क किसी निजी व्यक्ति की नहीं, बल्कि आम जनता के इस्तेमाल का रास्ता है और इसे लंबे समय तक इसी हालत में छोड़ देना उचित नहीं है।

22 सितंबर को सड़क पर बैठकर जताया था विरोध

समस्या को लेकर 22 सितंबर को सामाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद सलीम के नेतृत्व में ग्रामीणों ने इसी बदहाल सड़क पर बैठकर विरोध प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन के बाद संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को लिखित शिकायत देकर सड़क की स्थिति से अवगत कराया गया।

लेकिन प्रदर्शन और शिकायत के बाद भी ग्रामीणों के मुताबिक स्थिति जस की तस बनी हुई है।

न निरीक्षण, न मरम्मत, न स्पष्ट समयसीमा।

यही वजह है कि ग्रामीण अब सवाल उठा रहे हैं कि आखिर उनकी समस्या के समाधान के लिए उन्हें कितनी बार सड़क पर उतरना पड़ेगा?

विधायक और ग्राम प्रधान से भी ग्रामीणों के सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की समस्या स्थानीय जनप्रतिनिधियों के संज्ञान में भी लाई जा चुकी है। इसके बावजूद अभी तक सड़क मरम्मत का काम शुरू नहीं हुआ।

ग्रामीणों का तर्क है कि अगर जल जीवन मिशन के बजट में सड़क की मरम्मत का प्रावधान नहीं है, तो अन्य उपलब्ध मदों, ग्राम पंचायत या संबंधित विकास निधि से इस छोटे से हिस्से को ठीक कराने की व्यवस्था क्यों नहीं की जा रही?

यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि समस्या केवल 300 मीटर की है, लेकिन परेशानी रोजाना पूरे गांव को झेलनी पड़ रही है।

धूल, गड्ढे और रास्ते की बदहाली से बढ़ रही परेशानी

सड़क की खराब हालत के कारण दोपहिया वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। धूल उड़ने से आसपास रहने वाले लोगों को भी दिक्कत होती है। वहीं बुजुर्गों और स्कूली बच्चों के लिए इस रास्ते से निकलना किसी चुनौती से कम नहीं है।

अब ग्रामीणों ने आर-पार की चेतावनी दी

ग्रामीणों का कहना है कि डेढ़ साल का इंतजार काफी है। 22 सितंबर को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन और लिखित शिकायत के बावजूद यदि समस्या का समाधान नहीं होता है तो अब आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि 300 मीटर सड़क का पैचवर्क जल्द शुरू नहीं किया गया, तो संबंधित विभागों और जनप्रतिनिधियों के कार्यालयों के बाहर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा और अधिकारियों से सड़क निर्माण की स्पष्ट समयसीमा मांगी जाएगी।

 

ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें आश्वासन नहीं, सड़क चाहिए।

डेढ़ साल से सड़क खुदी पड़ी है।

22 सितंबर को प्रदर्शन हो चुका है।

लिखित शिकायत दी जा चुकी है।

जिलाधिकारी तक मामला पहुंच चुका है।

फिर भी अगर जवाब सिर्फ “बजट नहीं है” है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर इस समस्या के समाधान की जिम्मेदारी किसकी है?

घिस्सुपुरा के ग्रामीण अब जवाब चाहते हैं—300 मीटर सड़क आखिर कब बनेगी?

और यदि सड़क की मरम्मत के लिए संबंधित योजना में बजट नहीं है, तो वैकल्पिक व्यवस्था कर सड़क ठीक कराने की जिम्मेदारी कौन लेगा और कब तक?

यह भी पढ़ें

अधिकारियों से 5 सीधे सवाल

1. डेढ़ साल से सड़क बदहाल, आखिर जिम्मेदार कौन?

2. 300 मीटर सड़क की मरम्मत के लिए बजट क्यों नहीं?

3. 22 सितंबर के प्रदर्शन और लिखित शिकायत के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं?

4. ग्रामीणों को सिर्फ आश्वासन नहीं, सड़क मरम्मत 
की समय सीमा कब मिलेगी?

5. अगर जल जीवन मिशन में बजट नहीं है, तो वैकल्पिक व्यवस्था कर सड़क कौन और कब ठीक कराएगा?

6. “बजट नहीं है तो समाधान की जिम्मेदारी किसकी है?”
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