हरिद्वार ग्रामीण में कुदरत का कहर: भारी ओलावृष्टि से किसानों की फसलें तबाह, पथरी क्षेत्र में भारी नुकसान—प्रशासन तत्काल कराए सर्वे, किसानों को मिले मुआवजा
ढाई-ढाई सौ ग्राम तक के ओले गिरने का दावा, खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद और मकानों की टिन की चादरों में हुए छेद; सामाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद सलीम ने प्रभावित गांवों का दौरा कर उठाई मुआवजे की मांग।
- By गुलज़ार अहमद --
- Friday, 09 Oct, 2026
Global Star News
( रिपोर्ट: गुलज़ार अहमद)- हरिद्वार। हरिद्वार ग्रामीण क्षेत्र में तेज आंधी, बारिश और भारी ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। पथरी क्षेत्र सहित आसपास के गांवों में ओलावृष्टि से फसलों को भारी नुकसान होने की बात सामने आई है। खेतों में खड़ी फसलें प्रभावित होने से किसानों के सामने आर्थिक संकट गहराने की आशंका है। वहीं, बड़े आकार के ओले गिरने से कई मकानों की टिन की चादरों में छेद होने की भी जानकारी मिली है।
स्थानीय किसानों के अनुसार, कुछ स्थानों पर लगभग 250 ग्राम तक के ओले गिरे। किसानों का कहना है कि उन्होंने महीनों की मेहनत और हजारों रुपये खर्च करके फसलें तैयार की थीं, लेकिन प्राकृतिक आपदा ने उनकी उम्मीदों को बड़ा झटका दिया है। अब किसानों को चिंता सता रही है कि फसल खराब होने की स्थिति में परिवार का खर्च, खेती पर लिया गया कर्ज और अगली फसल की बुआई कैसे हो पाएगी।
मोहम्मद सलीम ने प्रभावित गांवों का किया दौरा, किसानों का दर्द जाना
ओलावृष्टि से हुए नुकसान के बाद सामाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद सलीम ने प्रभावित गांवों का दौरा कर किसानों की समस्याएं सुनीं और नुकसान का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि किसान देश की अर्थव्यवस्था और खाद्य व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। किसान दिन-रात मेहनत करके फसल तैयार करता है और खेती के लिए खाद, बीज, सिंचाई सहित अन्य व्यवस्थाओं पर अपनी जमा पूंजी खर्च करता है। ऐसे में प्राकृतिक आपदा के कारण फसल बर्बाद होना उसके लिए गंभीर आर्थिक संकट बन सकता है।
उन्होंने कहा कि प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए प्रशासन को संवेदनशीलता के साथ तत्काल कदम उठाने चाहिए। केवल आश्वासन देने से किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं होगा, बल्कि जमीनी स्तर पर नुकसान का आकलन कर उन्हें नियमानुसार आर्थिक सहायता उपलब्ध करानी होगी।
प्रशासन से तीन प्रमुख मांगें, लापरवाही से बढ़ सकती हैं किसानों की परेशानी
सामाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद सलीम ने सरकार और जिला प्रशासन से मांग की कि प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए तत्काल कार्रवाई की जाए।
1. तत्काल सर्वे कराया जाए: राजस्व विभाग और कृषि विभाग की संयुक्त टीमें प्रभावित गांवों में पहुंचकर खेतों का निरीक्षण करें और फसलों को हुए नुकसान का निष्पक्ष आकलन करें।
2. मकानों को हुए नुकसान का भी आकलन हो: ओलावृष्टि से टिन की छतों और अन्य संपत्तियों को हुए नुकसान को भी दर्ज किया जाए, ताकि पात्र प्रभावित परिवारों को नियमानुसार सहायता मिल सके।
3. किसानों को जल्द मुआवजा दिया जाए: सर्वे की प्रक्रिया अनावश्यक रूप से लंबित न रखी जाए। पात्र किसानों को निर्धारित नियमों के अनुसार शीघ्र आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए, जिससे वे अपने परिवार और खेती से जुड़ी जरूरतों को पूरा कर सकें।
अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी किसानों की निगाहें
पथरी क्षेत्र में ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती आर्थिक नुकसान से उबरना है। ऐसे में जिला प्रशासन और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है कि वे मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति का आकलन करें और राहत प्रक्रिया में तेजी लाएं।
सवाल यह है कि प्रभावित गांवों में नुकसान का सर्वे कब शुरू होगा और किसानों को मुआवजे के लिए कितना इंतजार करना पड़ेगा? किसानों को उम्मीद है कि शासन-प्रशासन उनकी परेशानी को गंभीरता से लेते हुए जल्द राहत पहुंचाएगा, ताकि प्राकृतिक आपदा की मार झेल रहे परिवारों को कुछ सहारा मिल सके।





