बिजली विभाग की घोर लापरवाही! 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन तालाब के पानी को छू रही, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा
सुल्तानपुर और टिक्कमपुर के बीच तालाब के ऊपर झूल रहे हाईटेंशन तारों से बेजुबान जानवरों और ग्रामीणों की सुरक्षा पर मंडराया खतरा, सामाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद सलीम ने बिजली विभाग के उच्च अधिकारियों से तत्काल कार्रवाई की उठाई मांग।
- By गुलज़ार अहमद --
- Sunday, 01 Nov, 2026
Global Star News
(रिपोर्ट: गुलज़ार अहमद)-लक्सर / नगर पंचायत सुल्तानपुर, हरिद्वार।- लक्सर विधानसभा क्षेत्र के नगर पंचायत सुल्तानपुर और टिक्कमपुर गांव के बीच पूर्व दिशा में स्थित एक तालाब के ऊपर से गुजर रही 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन बिजली लाइन को लेकर बिजली विभाग की गंभीर लापरवाही सामने आई है। हालात ऐसे हैं कि हाईटेंशन लाइन के तार एक पोल से दूसरे पोल के बीच इतने नीचे झूल रहे हैं कि उनका निचला हिस्सा तालाब के पानी को छू रहा है। यह स्थिति किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
तालाब के पानी तक पहुंची हाईटेंशन लाइन, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
जानकारी के अनुसार, दिनांक 31 अक्टूबर 2026 को सामाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद सलीम अपने साथियों के साथ इस मार्ग से गुजर रहे थे। इसी दौरान उनकी नजर तालाब के ऊपर से गुजर रही 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन पर पड़ी। मौके पर उन्होंने देखा कि बिजली के तार असामान्य रूप से नीचे लटक रहे हैं और उनका बीच का हिस्सा तालाब के पानी को छू रहा है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह कोई सामान्य बिजली लाइन नहीं, बल्कि 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन है। यदि इस स्थिति में कोई तकनीकी खराबी, तार का क्षतिग्रस्त होना या अन्य विद्युत दुर्घटना होती है, तो तालाब और उसके आसपास मौजूद लोगों तथा पशुओं के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।
बेजुबान जानवरों की जान पर भी मंडरा रहा खतरा
तालाब में अक्सर जंगली जानवर और ग्रामीणों के पशु पानी पीने के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में पानी के संपर्क में आ रहे हाईटेंशन तारों की स्थिति बेहद चिंताजनक है। किसी भी प्रकार की विद्युत लीकेज या अन्य खराबी की स्थिति में बेजुबान जानवर इसकी चपेट में आ सकते हैं। आसपास से गुजरने वाले ग्रामीणों और राहगीरों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
क्या किसी बड़े हादसे के बाद जागेगा बिजली विभाग?
सामाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद सलीम ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह मार्ग हरिद्वार-लक्सर मार्ग से जुड़ा हुआ है और यहां से प्रतिदिन ग्रामीणों एवं अन्य लोगों का आवागमन होता है। इसके बावजूद 11 हजार वोल्ट की लाइन का इस तरह नीचे लटकना और तालाब के पानी को छूना विभागीय निगरानी पर सवाल खड़े करता है।
उन्होंने कहा कि भले ही तारों पर प्लास्टिक की परत चढ़ी हुई दिखाई दे रही हो, लेकिन इससे इस स्थिति को सुरक्षित नहीं माना जा सकता। हाईटेंशन लाइन का पानी के संपर्क में होना अत्यंत गंभीर विषय है। इसकी तकनीकी जांच और तत्काल सुरक्षा कार्रवाई आवश्यक है।
उन्होंने सवाल किया कि आखिर बिजली विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की नजर अब तक इस समस्या पर क्यों नहीं पड़ी? क्या संबंधित क्षेत्र में बिजली लाइनों का नियमित निरीक्षण नहीं किया जाता? यदि निरीक्षण किया जाता है तो इस तरह की खतरनाक स्थिति अब तक ठीक क्यों नहीं कराई गई?
बिजली विभाग के उच्च अधिकारियों से तत्काल कार्रवाई की मांग
मोहम्मद सलीम ने बिजली विभाग के उच्च अधिकारियों से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल संबंधित अधिकारियों और तकनीकी टीम को मौके पर भेजा जाए। हाईटेंशन लाइन की बिजली आपूर्ति को आवश्यकतानुसार सुरक्षित तरीके से बंद कराकर पूरे क्षेत्र का निरीक्षण किया जाए तथा तारों को निर्धारित सुरक्षित ऊंचाई पर व्यवस्थित कराया जाए।
साथ ही, जब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो जाता, तब तक तालाब और उसके आसपास के क्षेत्र को सुरक्षित करने के लिए आवश्यक चेतावनी एवं सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
विभागीय अधिकारियों की जवाबदेही तय होना जरूरी
यह मामला केवल बिजली के तार नीचे लटकने तक सीमित नहीं है, बल्कि आमजन और बेजुबान जानवरों की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया और कोई दुर्घटना होती है, तो जिम्मेदारी किसकी होगी? यह सवाल अब बिजली विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों के सामने है।
मोहम्मद सलीम ने स्पष्ट कहा कि विभाग को किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार नहीं करना चाहिए। जनसुरक्षा सर्वोपरि है और किसी भी संभावित हादसे को रोकना संबंधित विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। प्रशासन और बिजली विभाग को इस मामले में तत्काल संज्ञान लेकर धरातल पर कार्रवाई करनी चाहिए।





