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हरिद्वार में मदरसों पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, जांच में सामने आईं कई अनियमितताएं

हरिद्वार में मदरसों पर प्रशासन का शिकंजा, 131 मदरसों की जांच पूरी, 23 संस्थानों की फंडिंग पर रोक

हरिद्वार में मदरसों पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, जांच में सामने आईं कई अनियमितताएं
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रिपोर्ट: गुलज़ार अहमद 

हरिद्वार। उत्तराखंड सरकार द्वारा प्रदेशभर में चलाए जा रहे मदरसा सत्यापन अभियान के तहत हरिद्वार जिले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में कई मदरसों में रिकॉर्ड संबंधी गड़बड़ियां और व्यवस्थागत अनियमितताएं सामने आने के बाद प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं।

जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के अनुसार पीएम पोषण योजना से जुड़े 131 मदरसों की जांच की गई, जिसमें 23 मदरसों की गतिविधियां संदिग्ध पाए जाने पर उनकी मार्च और अप्रैल माह की धनराशि रोक दी गई है। साथ ही इन संस्थानों की विस्तृत जांच के निर्देश दिए गए हैं।

छात्र संख्या और दस्तावेजों में मिला बड़ा अंतर

जांच के दौरान कई मदरसों में छात्रों की वास्तविक संख्या और सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज संख्या में अंतर पाया गया। अधिकारियों का कहना है कि उपस्थिति रजिस्टर, खर्च विवरण और अन्य दस्तावेजों में भी कई विसंगतियां सामने आई हैं, जिसकी गहन पड़ताल की जा रही है।

बाहरी राज्यों से आए बच्चों का भी होगा सत्यापन

प्रशासन को जांच में यह जानकारी भी मिली है कि कुछ मदरसों में बाहरी राज्यों से बच्चों को लाकर रखा और पढ़ाया जा रहा है। अब प्रशासन यह पता लगाने में जुटा है कि इन बच्चों को कौन लेकर आया, उनका सत्यापन कैसे हुआ और वे किन परिस्थितियों में यहां रह रहे हैं।

शिक्षकों और छात्रों की पहचान की जाएगी सत्यापित

डीएम मयूर दीक्षित ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाना सरकार की प्राथमिकता है। जिन मदरसों में स्थिति संदिग्ध मिली है वहां पढ़ाने वाले शिक्षकों और अध्ययनरत छात्रों का भी सत्यापन कराया जाएगा। इसके अलावा 11 मदरसों में पीएम पोषण योजना बंद करने के आदेश जारी किए गए हैं।

वित्तीय रिकॉर्ड और बैंक खातों की होगी जांच

सूत्रों के मुताबिक कई मदरसों में आर्थिक अनियमितताओं की आशंका भी जताई जा रही है। प्रशासन अब बैंक खातों, छात्र पंजीकरण, सरकारी अनुदान और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की भी विस्तार से जांच करेगा।

बिना मान्यता संचालित मदरसों पर सरकार सख्त

राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि 1 जुलाई 2026 के बाद प्रदेश में केवल वही मदरसे संचालित हो सकेंगे जिन्हें उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड और अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता प्राप्त होगी। बिना मान्यता चल रहे संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

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