धनपुरा की मुख्य सड़क बनी मुसीबत, गड्ढों में तब्दील रास्ते पर जिम्मेदारों की चुप्पी से ग्रामीणों में आक्रोश
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन तक पहुंची शिकायत, ग्रामीण बोले—अब आश्वासन नहीं, सड़क की मरम्मत और जिम्मेदारों से जवाब चाहिए
- By गुलज़ार अहमद --
- Wednesday, 12 Aug, 2026
Global Star News
(रिपोर्ट: गुलज़ार अहमद)- धनपुरा, उत्तराखंड। ग्राम पंचायत धनपुरा में विकास के दावों के बीच गांव की मुख्य सड़क की बदहाल तस्वीर जिम्मेदार विभागों और जनप्रतिनिधियों के लिए गंभीर सवाल खड़े कर रही है। धनपुरा अड्डे से झंडा चौक, अली चौक होते हुए शिव मंदिर पीठ बाजार तक जाने वाला मुख्य मार्ग जगह-जगह टूटकर बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो चुका है। सड़क पर उखड़ी रोड़ियां और गड्ढे राहगीरों तथा वाहन चालकों के लिए लगातार खतरा बने हुए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई सामान्य संपर्क मार्ग नहीं, बल्कि ग्राम पंचायत के बड़ी आबादी के आवागमन का प्रमुख रास्ता है। रोजाना बड़ी संख्या में लोग स्कूल, बाजार, कामकाज और अन्य जरूरी कार्यों के लिए इसी मार्ग का इस्तेमाल करते हैं। इसके बावजूद सड़क की हालत लंबे समय से खराब बनी हुई है।
पैदल चलना मुश्किल, शव यात्रा तक में परेशानी
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद सलीम ने सड़क की स्थिति पर नाराजगी जताते हुए कहा कि सड़क पर बने गहरे गड्ढों और बिखरी रोड़ियों के कारण पैदल चलना तक मुश्किल हो गया है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए स्थिति और भी जोखिम भरी है।
उन्होंने कहा कि सड़क की बदहाली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गांव में किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर अंतिम यात्रा के दौरान शव यात्रा ले जाने में भी लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। यह स्थिति किसी भी जिम्मेदार व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय होनी चाहिए।
बार-बार शिकायत के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं?
ग्रामीणों के अनुसार सड़क की मरम्मत और निर्माण को लेकर संबंधित अधिकारियों को कई बार प्रार्थना पत्र दिए जा चुके हैं, लेकिन अभी तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ है।
ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब सड़क की समस्या जिम्मेदार अधिकारियों के संज्ञान में लाई जा चुकी है, तो आखिर अब तक मरम्मत का काम क्यों शुरू नहीं हुआ?
क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है?
क्या सड़क की स्थिति का मौके पर निरीक्षण करने के बाद भी जिम्मेदार विभाग इसे जरूरी नहीं मानता?
और यदि मरम्मत प्रस्तावित है, तो उसकी समयसीमा क्या है और काम कब शुरू होगा?
इन सवालों का जवाब ग्रामीणों को जिम्मेदार विभाग और संबंधित जनप्रतिनिधियों से चाहिए।
चुनाव के समय दिखाई देने वाले जनप्रतिनिधि अब कहां हैं?
ग्रामीणों में इस बात को लेकर भी नाराजगी है कि चुनाव के दौरान जनता के बीच पहुंचकर विकास और समस्याओं के समाधान के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव के बाद बुनियादी समस्याएं जस की तस रह जाती हैं।
ग्रामीणों का सवाल है कि जब धनपुरा की मुख्य सड़क इतनी खराब हालत में है, तो क्षेत्र के वर्तमान जनप्रतिनिधि और चुनाव के दौरान जनता से समर्थन मांगने वाले दावेदार इस समस्या को लेकर गंभीर पहल क्यों नहीं कर रहे हैं?
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1905 पर पहुंचा मामला
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद सलीम ने बताया कि संबंधित अधिकारियों से शिकायत के बावजूद समाधान नहीं होने पर मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1905 पर भी सड़क की समस्या की शिकायत दर्ज कराई गई है।
अब मामला उच्च स्तर तक पहुंचने के बाद ग्रामीणों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि संबंधित विभाग शिकायत को केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रखेगा, बल्कि मौके का निरीक्षण कर सड़क की वास्तविक स्थिति का आकलन करते हुए मरम्मत या पुनर्निर्माण की ठोस कार्रवाई करेगा।
ग्रामीणों की चेतावनी—अब सिर्फ आश्वासन नहीं, काम चाहिए
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की समस्या पर लंबे समय से केवल शिकायत और आश्वासन का दौर चल रहा है। अब उन्हें आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाला काम चाहिए।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सड़क की मरम्मत या पुनर्निर्माण की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई तो वे जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। इसके बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ तो धरना-प्रदर्शन और आंदोलन का रास्ता अपनाया जा सकता है।
ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि यदि सड़क की बदहाली के कारण कोई दुर्घटना होती है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी, यह भी प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए।
अब प्रशासन के सामने सीधी चुनौती
धनपुरा की मुख्य सड़क की स्थिति अब महज ग्रामीणों की परेशानी का विषय नहीं रह गई है। यह सड़क सुरक्षा, जनसुविधा और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा मामला बन चुका है।
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन तक शिकायत पहुंचने के बाद अब संबंधित विभाग और प्रशासन के सामने सवाल साफ है—क्या सड़क की स्थिति का स्थलीय निरीक्षण कर तत्काल कार्रवाई की जाएगी या ग्रामीणों को अपनी मूलभूत सुविधा के लिए आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा?
अब देखना होगा कि जिम्मेदार विभाग इस शिकायत पर कितनी जल्दी कार्रवाई करता है और सड़क की मरम्मत के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।
ग्रामीणों की मांग स्पष्ट है—सड़क की हालत का तत्काल निरीक्षण हो, जिम्मेदार विभाग कार्रवाई की समयसीमा तय करे और गड्ढों से मुक्ति दिलाकर सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित किया जाए।
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