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(रिपोर्ट: गुलज़ार अहमद)- हरिद्वार ग्रामीण (धनपुरा)। कहते हैं कि इंसान के हौसले बुलंद हों तो शारीरिक चुनौतियां भी उसके कदम नहीं रोक सकतीं। जिंदगी में कितनी भी मुश्किलें क्यों न हों, अगर कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो इंसान हर परिस्थिति से लड़ सकता है। ऐसी ही मिसाल ग्राम पंचायत धनपुरा निवासी सूरज पुत्र श्री रमन पेश कर रहे हैं, जो दोनों पैरों से दिव्यांग होने के बावजूद किसी के सामने हाथ फैलाने के बजाय अपनी मेहनत और ईमानदारी से परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं।
सूरज धनपुरा अड्डे पर पंजाब नेशनल बैंक के सामने बरगद के पेड़ के नीचे बैठकर लोगों के जूते पॉलिश करते हैं। यही उनकी रोजी-रोटी का सहारा है। अपनी शारीरिक असमर्थता के बावजूद वह प्रतिदिन काम पर पहुंचते हैं और मेहनत करके अपने बच्चों तथा परिवार की जिम्मेदारियां निभा रहे हैं।
मेहनत करने के बावजूद सरकारी राशन से वंचित सूरज
सूरज के संघर्ष की कहानी यहीं खत्म नहीं होती। आर्थिक रूप से कमजोर होने और दोनों पैरों से दिव्यांग होने के बावजूद उन्हें सरकारी मुफ्त राशन योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
सूरज ने बताया कि उनके पास पीले रंग का राशन कार्ड है, जिसके आधार पर उन्हें सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान से राशन खरीदने के लिए पैसे देने पड़ते हैं। उनका कहना है कि उनकी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वह आसानी से परिवार का खर्च और राशन का बोझ उठा सकें। कई बार अनुरोध करने के बावजूद उनका राशन कार्ड पात्रता के अनुसार परिवर्तित नहीं हो पाया है।
टूटी व्हीलचेयर के सहारे तय करते हैं रोजी-रोटी का सफर
सूरज की परेशानी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिस पुरानी व्हीलचेयर के सहारे वह रोजाना काम पर पहुंचते हैं, वह भी अब काफी खराब हो चुकी है। हाथों से व्हीलचेयर चलाकर अपने काम तक पहुंचना उनके लिए बेहद कठिन हो जाता है। इसके बावजूद वह हिम्मत नहीं हारते और रोज अपनी आजीविका कमाने के लिए निकल पड़ते हैं।
सूरज की इच्छा है कि उन्हें बैटरी से चलने वाली ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराई जाए, ताकि वह बिना अधिक परेशानी के अपने काम पर आ-जा सकें और आत्मसम्मान के साथ मेहनत करके अपने परिवार का पालन-पोषण करते रहें।
समाजसेवी मोहम्मद सलीम ने दिया हरसंभव मदद का भरोसा
इसी दौरान समाजसेवी मोहम्मद सलीम धनपुरा अड्डे पर पहुंचे। उन्होंने सूरज से अपने जूते पॉलिश कराए। बातचीत के दौरान जब उन्हें सूरज की संघर्षपूर्ण जिंदगी, आर्थिक स्थिति और सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलने की जानकारी हुई तो वह भी भावुक हो उठे।