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(रिपोर्ट: गुलज़ार अहमद)- हरिद्वार, 26 जुलाई 2026। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा हाल ही में राज्य वन्यजीव बोर्ड की बैठक में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने और वन्यजीव संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों को राज्य स्तरीय सम्मान दिए जाने की घोषणा के बाद हरिद्वार में एक नई चर्चा शुरू हो गई है।

सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि सरकार वास्तव में जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित करना चाहती है, तो वर्षों से बिना किसी प्रचार, निजी स्वार्थ या सरकारी लाभ के वन्यजीवों की सेवा में जुटे लोगों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

इसी क्रम में हरिद्वार वन प्रभाग की पथरी रेंज में पिछले लगभग दस वर्षों से वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद सलीम का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सलीम ने न केवल वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए लगातार कार्य किया है, बल्कि कई ऐसे प्रयास किए हैं जिनसे जंगलों में रहने वाले बेजुबान जीवों का जीवन बचाने में मदद मिली।

भीषण गर्मी में वन्यजीवों के लिए बने सहारा
हर वर्ष गर्मी के मौसम में जब जंगलों के प्राकृतिक जल स्रोत सूखने लगते हैं और वन्यजीव पानी की तलाश में भटकते हैं, तब मोहम्मद सलीम अपने साथियों के सहयोग से पथरी जंगल के विभिन्न तालाबों और जल स्रोतों में पानी भरवाने का कार्य करते हैं। इस पहल से हाथी, हिरण, नीलगाय, बंदर सहित अनेक वन्यजीवों को भीषण गर्मी के दौरान राहत मिलती है और उन्हें पानी की तलाश में आबादी की ओर आने की आवश्यकता कम पड़ती है।

रेस्क्यू अभियान और अवैध शिकार रोकने में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
वन्यजीव संरक्षण केवल पानी उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहा। मोहम्मद सलीम ने कई बार घायल, भटके या संकट में फंसे वन्यजीवों के रेस्क्यू अभियानों में वन विभाग का सहयोग किया। इसके साथ ही उन्होंने अवैध शिकार और वन्यजीव अपराधों की सूचनाएं समय-समय पर संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाकर कार्रवाई में अहम भूमिका निभाई। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को वन्यजीवों के प्रति संवेदनशील बनाने और संरक्षण का संदेश देने का कार्य भी वे लगातार करते रहे हैं।

रेलवे ट्रैक पर वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर वर्षों से उठा रहे हैं आवाज
मोहम्मद सलीम लंबे समय से पथरी जंगल–लक्सर रेलवे लाइन पर वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए फेंसिंग या सुरक्षा बाउंड्री बनाए जाने की मांग करते रहे हैं। उनका कहना है कि विशेषकर रात और घने कोहरे के दौरान हाथी, हिरण तथा अन्य जंगली जानवर रेलवे ट्रैक पर पहुंच जाते हैं, जिससे कई बार ट्रेन की चपेट में आकर उनकी दर्दनाक मौत हो जाती है। उनका मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी सुरक्षा उपाय किए जाएं, तो अनेक वन्यजीवों का जीवन बचाया जा सकता है।

मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप हो निष्पक्ष मूल्यांकन
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि मुख्यमंत्री की घोषणा तभी सार्थक होगी, जब वास्तविक रूप से जमीनी स्तर पर वर्षों से कार्य कर रहे लोगों का निष्पक्ष मूल्यांकन किया जाए।

उनका कहना है कि यदि मोहम्मद सलीम के कार्यों से संबंधित आवेदन, समाचार, फोटो, वीडियो तथा वन विभाग के अभिलेख उपलब्ध हैं और वे निर्धारित मानकों पर खरे उतरते हैं, तो मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप राज्य स्तरीय सम्मान के लिए उनके नाम पर नियमों के तहत गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

स्थानीय लोगों का मानना है कि ऐसे निस्वार्थ सेवाभावी व्यक्तियों को सम्मानित करने से न केवल उनके कार्यों को पहचान मिलेगी, बल्कि समाज के अन्य लोग भी वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए आगे आने के लिए प्रेरित होंगे।

अब सबकी निगाहें उत्तराखंड वन विभाग और राज्य वन्यजीव बोर्ड पर टिकी हैं। देखना यह होगा कि क्या वर्षों से प्रकृति और वन्यजीवों की रक्षा में समर्पित ऐसे जमीनी कार्यकर्ताओं के योगदान को उचित सम्मान मिल पाता है या नहीं।