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(रिपोर्ट: गुलज़ार अहमद)-सहारनपुर। आगामी विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। सहारनपुर के गागलहेड़ी में आयोजित होने जा रहे कांग्रेस कार्यकर्ता सम्मेलन को अब केवल संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं, बल्कि 2027 के चुनावी अभियान की बड़ी शुरुआत माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस सम्मेलन के जरिए कांग्रेस जिले की सातों विधानसभा सीटों पर अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।
सूत्रों के अनुसार, सम्मेलन में कई बड़े राजनीतिक चेहरों के कांग्रेस में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। यही वजह है कि बसपा और सपा दोनों दलों में इस कार्यक्रम को लेकर बेचैनी देखी जा रही है। माना जा रहा है कि कांग्रेस मुस्लिम, दलित, गुर्जर और अन्य सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश में जुटी है।
कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन
18 मई 2026 को आयोजित होने वाले इस कार्यकर्ता सम्मेलन में भारी भीड़ जुटने की संभावना है। कांग्रेस इसे संगठन की एकता, विकास और न्याय के संकल्प के रूप में पेश कर रही है। पार्टी नेताओं का दावा है कि यह सम्मेलन सहारनपुर की राजनीति में नया संदेश देगा और कार्यकर्ताओं में नया उत्साह पैदा करेगा।
विपक्षी दलों में बढ़ी चिंता
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सम्मेलन में बड़े नेताओं की एंट्री होती है तो इसका असर 2027 के विधानसभा चुनाव पर पड़ सकता है। सपा और बसपा दोनों दल इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। खासतौर पर बसपा के कुछ वरिष्ठ नेताओं के कांग्रेस में जाने की चर्चाओं ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है।
जातीय समीकरण साधने की कोशिश
बताया जा रहा है कि कांग्रेस इस सम्मेलन के जरिए सामाजिक और जातीय समीकरणों को मजबूत करने की तैयारी में है। पार्टी नेतृत्व पश्चिमी यूपी में अपना जनाधार बढ़ाने के लिए लगातार सक्रिय दिखाई दे रहा है।
गागलहेड़ी का यह सम्मेलन अब केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि 2027 की राजनीतिक रणनीति का बड़ा मंच माना जा रहा है।